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प्लाज्मा थेरेपी क्या है ?


प्लाज्मा थेरेपी को साधारण भाषा मे समझा जाये  वो मरीज जो किसी प्रकार के संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर मे उस संक्रमण से लड़ने वाले प्रतिरोधी एंटीबॉडी विकसित हो जाते हैं। इन एंटीबाडीज की मदद से किसी अन्य संक्रमित मरीज को ठीक किया जा सकता हैं। किसी मरीज के शरीर से एंटीबॉडीज उसके स्वस्थ होने के 14 दिन बाद ही लिए जा सकते हैं और उस मरीज का ठीक होने के बाद कम से कम दो  बार संक्रमण परिक्षण किया जाता हैं। स्वस्थ हो चुके मरीज का एलिजा परिक्षण किया जाता हैं जिससे उसके शरीर मे एंटीबॉडीज की मात्रा का पता चलता हैं।

स्वस्थ मरीज का स्प्रेसेस विधि से खून निकला जाता हैं जिसमे खून से प्लाज्मा या प्लेटलेट्स जैसे अवयवो को निकल कर बाकि बचे खून को वापस उसी मरीज के शरीर मे डाल दिया जाता हैं। ऐसा इसलिए किया जाता हैं क्युकी एंटीबॉडीज केवल प्लाज्मा मे मौजूद होते हैं। रक्तदाता मरीज से 800 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जाता हैं और एक संक्रमित मरीज को 200 मिलीलीटर प्लाज्मा चढ़ाया जाता हैं। यह प्लाज्मा संक्रमित मरीज की रोग प्रतिरोधक छमता को बढ़ा देता हैं।
एक स्वस्थ मरीज से चार अन्य संक्रमित मरीज को ठीक किया जा सकता हैं। प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग कई सदियों से ऐसे संक्रामक रोग के उपचार मे किया जाता हैं जिनका कोई निश्चित इलाज नहीं होता हैं जैसे- सार्स, मर्स, H1N1, इत्यादि। वर्तमान समय मे पूरे विश्व मे कोरोना वायरस का संक्रमण फ़ैल गया हैं और इस संक्रमण का अभी तक कोई निश्चित इलाज ना होने के कारण डॉक्टर्स ने प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग करना शुरू कर दिया हैं जिसका परिणाम काफ़ी अच्छा आ रहा हैं।

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