Skip to main content

15 ऐसी बातें जो बनारस को दुनिया का सबसे 'अद्भुत' शहर साबित करती हैं..


1. जहां लोग एक दूसरे को हाय-हैलो और नमस्ते के बजाय महादेव बोलते हैं और इसमें फिरंगी भी बराबर सहयोग देते हैं.
2. गर आप कभी भी बनारस गए हैं या जाएंगे तो आप गुरू शब्द का असल मायने जान जाएंगे. तिस पर से भी यदि ऐसी कोई संभावना नहीं है तो आप हिन्दी के मशहूर साहित्यकार काशीनाथ सिंह की “काशी का अस्सी” तो पढ़ ही लें. गुरू को समझने में सहूलियत होगी.
3. ‘भोसड़ी के’ काशी का सामूहिक और अलहदा संबोधन है. इस एक गाली को वहां इतने अंदाज़ से दिया जाता है कि इस गाली का पूरा विवरण लिखते-लिखते लोग डॉक्टरेट कर लें.
4. चाहे यहां के लोग कितने ही ब्रांडेड और मंहगे कपड़े पहने हों, मगर उसके ऊपर से ओढ़ा जाने वाला मल्टीपरपज़ गमछे के बिना ऐसा लगता है जैसे कुछ छूट गया हो.
5. चाय तो लगभग दुनिया के सारे कोने में मिल जाती है, मगर यहां चाय लड़ती है और उस चाय की अड़ी पर रोजाना जाने कितनी ही सरकारें गिराई और बनाई जाती हैं.
6. यहां की पान पूरी दुनिया में मशहूर है और उससे भी ज़्यादा मशहूर हैं यहां के पान के शौकीन लोग जो गाल के एक तरफ़ पान घुलाए रखते हैं और दूसरी तरफ से गुलाब जामुन खा लिया करते हैं.
7. ‘जिया राजा’ के संबोधन को यहां तब इस्तेमाल किया जाता है जब किसी को शाबासी देनी हो या फिर किसी पर फिकरा कसना हो...
8. बनारसी भोजपुरी बोलते हैं, भोजपुरी चलते हैं, भोजपुरी में ही हंसते और गरियाते हैं क्योंकि भोजपुरी एक बेहद कूल भाषा है.
9. आपका चित्त चाहे जितना ही विचलित चल रहा हो, मगर दशाश्वमेध घाट के शाम की गंगा आरती आपको शांत करने के लिए पर्याप्त है.
10. काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद को बराबर सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है. यहां के गंगा-जमुनी तहज़ीब की लोग आज भी कसमें खाते हैं, और यहां के रामलीला को देखने तो पूरी दुनिया से लोग यहां तक चल कर आते हैं.
11. बनारस इसके आस-पास के शहरों या कहें तो राज्यों के लिए व्यापार का भी केन्द्र है जहां लोगों के मोलभाव के अंदाज़-ए-बयां को देख कर आप हैरत में पड़ जाएंगे.
12. चाहे वो राजा भैया हों, बृजेश सिंह हों, मुख्तार अंसारी हों, मुन्ना बजरंगी हों या फिर धनंजय सिंह जैसे माफिया डॉन. लोग यहां इनके बारे में चाय पर चर्चा करते हैं.
13. अधिकांश बनारसियों के लिंक्स का तो आप अंदाज़ा ही नहीं लगा सकते. यहां एक आम सा दिखने वाला बनारसी भी प्रधानमंत्री मोदी से लेकर मुख्यमंत्री से सीधे बतियाने की हैसियत रखता है.
14. यहां सुबह-सुबह मिलने वाली जलेबी-कचौड़ी, लस्सी, लौंगलत्ते और मिठाइयां यदि आपने एक बार खा ली तो आप चाहे दुनिया में कहीं भी चले जाएं इससे बेहतर टेस्ट तो आप पाने से रहे.
15. यहां की मेनस्ट्रीम राजनीति की तो बात फिर भी ठीक है, मगर यहां के छात्र राजनीति के भी जलवे हैं और उसकी गूंज पूरे देश में सुनाई पड़ती है. काशी हिन्दू विश्व विद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और हरिश्चंद्र महाविद्यालयों की राजनीति तो बस ट्रेंड सेटर है.
तो भैया ये तो हुई लिखा-पढ़ी वाली बात और जो गर आप बनारस को थोड़ा समझना चाहते हैं, थोड़ा उसका रस लेना चाहते हैं तो फिर आपको बनारस के घाटों, गलियों और मंदिर-मसिजिदों की खाक छाननी पड़ेगी. आख़िर बिना संघर्ष के सारा मज़ा थोडै न मिल जाएगा. तो जरा कुछ दिन तो गुज़ारिए बनारस में जिसे प्रधानमंत्री मोदीजी क्योटो बनाने पर आमादा हैं. तब तक के लिए हर-हर महादेव

Comments

Popular posts from this blog

कहानी : बकरी की सहेलियां (दोस्ती की परख)

एक बार की बात है, एक बकरी थी। वो बहुत खुशी-खुशी अपने गांव में रहती थी। वो बहुत मिलनसार थी। बहुत सारी बकरियां उसकी सहेलियां थीं। उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। वो सभी से बात कर लेती थी और सभी को अपना दोस्त मान लेती थी। सभी कुछ अच्छा चल रहा था। लेकिन एक बार वो बकरी बीमार पड़ी और इस कारण वह धीरे-धीरे कमजोर होने लगी इसलिए अब वो पूरा-पूरा दिन घर पर ही बिताने लेगी। बकरी ने जो खाना पहले से अपने लिए जमा करके रखा था, अब वो भी खत्म होते जा रहा था। एक दिन उसकी कुछ बकरी सहेलियां उसका हाल-चाल पूछने उसके पास आईं, तब ये बकरी बड़ी खुश हुई। इसने सोचा कि अपनी सहेलियों से कुछ और दिनों के लिए वह खाना मंगवा लेगी। लेकिन वे बकरियां तो उससे मिलने के लिए अंदर आने से पहले ही उसके घर के बाहर रुक गईं और उसके आंगन में रखा उसका खाना घास-फूस खाने लगीं। ये देखकर अब इस बकरी को बहुत बुरा लगा और समझ में आ गया कि उसने अपने जीवन में क्या गलती की? अब वो सोचने लगी कि काश! हर किसी को अपने जीवन का हिस्सा व दोस्त बनाने से पहले उसने उन्हें थोड़ा परख लिया होता है, तो अब इस बीमारी में उसकी मदद के लिए कोई तो होता। ...

Best Hindi Quotes

 1 - “जीवन में खुशी का अर्थ लड़ाइयाँ लड़ना नहीं, बल्कि उन से बचना है ।         कुशलतापूर्वक पीछे हटना भी अपने आप में एक जीत है ।”       🌹 क्योकि 🌹        "अभिमान" की ताकत फ़रिश्तो को भी "शैतान" बना देती है, और         "नम्रता" साधारण व्यक्ति को भी  "फ़रिश्ता" बना देती है । 2 - "कदर" और "वक्त" भी कमाल के होते हैं ..! जिसकी "कदर" करो वो "वक्त" नहीं देता..!!         और जिसको "वक्त" दो वो "कदर" नहीं करता 3 - 

भगवान श्रीपरशुराम का संक्षिप्त जीवन परिचय गाथा

आप  इसमें हमसे हुई गलतियों को अपना सुस्नेही समझ कर सुधार करेंगे,, अन्य_नाम:- जमदग्नि के पुत्र होने के कारण ये जामदग्न्य' भी कहे जाते हैं। अवतार:- विष्णु के दस अवतारों में से छठे अवतार वंश:-गोत्र भृगुवंश पिता:-जमदग्नि माता:-रेणुका जन्म विवरण:- इनका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया को रात्रि के प्रथम पहर यानि (प्रदोष काल)में हुआ था। अत: इस दिन व्रत करने और उत्सव मनाने की प्रथा है। धर्म_संप्रदाय:-हिंदू धर्म परिजन:-रुमण्वान, सुषेण, वसु, विश्वावसु (सभी भाई) विद्या पारंगत धनुष-बाण , परशु अन्य_विवरण:-परशुराम शिव के परम भक्त थे। अन्य_जानकारी:-इनका नाम तो राम था, किन्तु शिव द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये 'परशुराम' कहलाते थे। परशुराम राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका और भृगुवंशीय जमदग्नि के पुत्र थे। वे विष्णु के अवतार और शिव के परम भक्त थे। इन्हें शिव से विशेष परशु प्राप्त हुआ था। इनका नाम तो राम था, किन्तु शंकर द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये परशुराम कहलाते थे। परशुराम भगवान विष्णु के दस अवतारों में से छठे अवतार थे, जो...